Saturday, February 20, 2010

क्या आप अठारह साल से ऊपर हैं !

क्या आप अठारह साल से ऊपर हैं ? जिंदगी की बोरियत दूर करना चाहते हैं ? कुछ ठहाके लगाना चाहते हैं ? अपने दोस्तों को कुछ ऐसा भेजना चाहते हैं जिसे पढ़कर उनके चेहरे पर स्माईल आ जाये तो प्लीज हमें इस नम्बर पर एस एम एस या कॉल कीजिये। चार्जेज एक रुपया प्रति एस एम एस या प्रति कॉल। यह उन ढेर सारे एस एम एस विज्ञापनों में से एक है जो इन दिनों विभिन्न कम्पनियों के मोबाइल धारकों के मोबाईल फोन पर धड़ल्ले से आ रहे हैं। सीमा (20 एफ), राहुल (22 एम), नेहा (21 एफ) संजू (18 एम).... लॉट्स मोर लुकिंग फॉर फ्रैण्ड्स..... फाइण्ड ए फ्रैण्ड नेक्स्ट डोर, एस एम एस चैट टू ....। यह एक दूसरा नमूना है जो मोबाइल धारकों के पास लगातार आ रहा है।
आज बहुत सी मोबाइल कम्पनियां एक मोबाइल कनैक्शन खरीदने पर उसके साथ दो या तीन कनैक्शन निशुल्क दे रही हैं। माता-पिता ने वे फ्री मोबाइल कनैक्शन अपने बच्चों को उपलब्ध करवा दिये हैं ताकि उनके घर से बाहर रहने की स्थिति में भी कनैक्टिविटी बनी रहे। आज भारत में जितने मोबाइल हैं उनमें से लगभग 25 प्रतिशत मोबाइल अवयस्क बच्चों के पास हैं और 25 प्रतिशत मोबाइल कॉलेज जाने वाले वयस्क विद्यार्थियों के पास हैं। जब इन कच्ची उम्र, कच्चे मन और कच्ची बुध्दि के बच्चों और विद्यार्थियों के पास मोबाइल होंगे और उन पर धड़ल्ले से ऐसे विज्ञापन भेजे जायेंगे तो निश्चित ही है कि बड़ी संख्या में बच्चे इन विज्ञापनों के झांसे में फंस जायेंगे और वे जीवन की उन अनजान और खतरनाक राहों पर निकल पड़ेंगे जिनके बारे में सोच कर भी भय होता है।
मोबाइल का आवष्किार क्या इसलिये हुआ था कि समूची मानव सभ्यता इसकी चपेट में आकर दुर्घटनाग्रस्त हो जाये ? आज जितने भी वैज्ञानिक आविष्कार हो रहे हैं, उन्हें बाजार अपने कब्जे में कर लेता है। लालची लोग हर वैज्ञानिक अविष्कार को जल्दी से जल्दी और अधिक से अधिक पैसा कमाने का माध्यम बना लेते हैं। संचार माध्यमों पर बाजार की विशेष दृष्टि रहती है। रेडियो, टेलिविजन, टेलिफोन, इण्टरनेट, मोबाइल तो जैसे बाजार के तगड़े उपकरण या यू कहें कि वफादार गुलाम बनकर रह गये हैं। इन उपकरणों ने व्यापार को बाजार से निकालकर घरों और पलंगों तक पहुंचा दिया है।
वास्तव में तो इलैक्ट्रोनिक संचार माध्यम मानव की सेवा करने के लिये और उसकी जिंदगी आरामदेह बनाने के लिये बने हैं किंतु इन संचार माध्यमों का दुरुपयोग मानव जीवन में अनावश्यक आवश्यकताओं को पैदा करने और उन्हें खरीदने के लिये मजबूर करने में हो रहा है किंतु मैं जो बात कर रहा हूँ, वह केवल बाजारवाद के पसरते हुए पांवों तक ही सीमित नहीं है। मोबाइल फोन के कारण मासूम बच्चे, अल्पवय लड़कियां और आम आदमी अपराध की दुनिया के निशाने पर आ गया है। देश की राजधानी दिल्ली में इस तरह से वेश्यावृत्तिा करवाने वाले कई रैकेट्स का भण्डाफोड़ हो चुका है और पूरे देश में अविवाहित लड़कियों तथा किशोरियों में गर्भपात की संख्या तेजी से बढ़ रही है। हमें समझना होगा कि हमने अपने बच्चों को केवल मोबाइल फोन नहीं दिया है, उन्हें बाजार और अपराध की दुनिया के एक खतरनाक उपकरण से दुर्घटनाग्रस्त होने के लिये अकेला छोड़ दिया है।

3 comments:

  1. आज के बाजारवाद ने आनेवाली पीढी को तो गुमराह कर रखा है .. इसमें कोई शक नहीं .. भारतीय सभ्‍यता संस्‍कृति पर गहरा प्रभाव पड रहा है !!

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  2. सच्चाई की रोशनी दिखाती आपकी बात हक़ीक़त बयान करती है।

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