Tuesday, August 17, 2010

गाय–बछड़े तो भूखे मर जायेंगे किंतु भड़ुए भी लाडू नहीं जीम सकेंगे !

अजमेर में राजस्थान कॉपरेटिव डेयरी फेडरेशन के अधिकारी सुरेन्द्र शर्मा के घर और लॉकरों से लगभग दस करोड़ से अधिक की सम्पत्ति मिल चुकी है। इस बेहिसाब सम्पत्ति को देखकर यह अनुमान लगाना कठिन है कि एक आदमी को अपने जीवन में कितने पैसे की भूख हो सकती है! पन्द्रह अगस्त को प्रख्यात गायिका आशा भौंसले टेलिविजन के किसी चैनल को दिये गये साक्षात्कार में ठीक ही कह रही थीं कि यह देखकर बहुत दुख होता है कि कुछ लोगों के पास तो खाने को रोटी नहीं है और कुछ लोग रोटी के स्थान पर रुपया खा रहे हैं!

सुरेन्द्र शर्मा के घर और लॉकरों में से निकली सम्पत्ति वस्तुत: गायों के थनों में से दूध के रूप में प्रकट हुई है। यह दूध प्रकृति ने गायों के थनों में उनके बछड़ों के लिये दिया है और बछड़ों का पेट भरने के बाद बचा हुआ दूध मानवों के लिये दिया है किंतु मानव ने सारा का सारा दूध अपने लॉकर में भरकर न केवल बछड़ों को भूखों मरने पर विवश कर रखा है अपितु थन भर–भर कर दूध देने वाली गायों को भी सुबह शाम दूध निकालने के बाद सड़कों पर भटकने और मैला खाने के लिये छोड़ रखा है।

मानव के लालच की गाथा बड़ी है। वह गायों से मिले दूध में बेहिसाब पानी मिलाकर अधिक से अधिक लाभ अर्जित करने का षड़यंत्र करता है और अधिक से अधिक दूध पाने के लालच में गायों को सुबह शाम आॅक्सीटोसिन के इंजेक्शन लगाकर उन्हें धीमी मौत की तरफ धकेलता है। इतना करने के बाद भी उसका लालच पूरा नहीं होता। वह असली दूध के स्थान पर बाजार में यूरिया और डिटर्जेण्ट पॉउडर से बना हुआ नकली दूध बेचता है ताकि रातों रात करोड़ पति बन सके।

यह कैसा लालच! यह कैसा अंधेर खाता! जो पशु दूध दे रहे हैं, वे आॅक्सीटोसिन के शिकार हो रहे हैं। जिन बछड़ों के लिये दूध बना है, वे भूखों मर रहे हैं। जो पशुपालक दुधारू पशुओं को पाल रहे हैं, वे गरीबी की रेखा से नीचे जी रहे हैं। जिन बच्चों के लिये माता–पिता महंगे भाव का दूध खरीद रहे हैं, वे डिटर्जेण्ट और यूरिया से बने दूध का शिकार होकर मौत के मुंह में जा रहे हैं जबकि सुरेन्द्र शर्मा जैसे डेयरी फेडरेशन के अधिकारी इस दूध के बल पर करोड़ों रुपये जमा कर रहे हैं।

मेरी समझ में यह नहीं आता कि सुरेन्द्र शर्मा जैसे लोग इतना अधिक पैसा एकत्रित करके आखिर क्या करना चाहते हैं ? क्योंकि उनके बच्चों को भी तो दूसरों के बच्चों की तरह खाने पीने को दूध, घी, मावा, मिठाई, दही, छाछ सबकुछ नकली ही मिलेगा। अचार में फफूंदी लगी मिलेगी, टमाटर सॉस तथा कैचअप में लाल रंग का लैड आॅक्साइड मिलेगा। गेहूं सड़ा हुआ मिलेगा। इसलिये अधिक रुपये चुराकर भी क्या हो जायेगा! नकली खाद्य सामग्री तो वह कम पैसे में भी खरीद सकता है। इसीलिये मैंने लिखा है कि गाय भैंस तो भूखे मर जायेंगे किंतु भडु़ए भी लाडू नहीं जीम सकेंगे।

3 comments:

  1. ये सब इसने किया कैसे ?

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  2. ये तो एक छोटा सा उदाहरण है ...
    छोटी मछलियाँ ही फंसती हैं जाल में ...!

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  3. सही कहा आपने। जब छोटी मछली दस करोड़ की है तो बड़ी मछली मधु कौड़ा से क्या कम होगी जिसने झारखण्ड में 8000 करोड़ का घोटाला किया। – डॉ. मोहनलाल गुप्ता

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