Saturday, January 16, 2010

भारत की पारिवारिक और सामाजिक व्यवस्था को बचाना होगा!

लेगटम प्रोस्पेरिटी रिपोर्ट ने भारत को सामाजिक व्यवस्था के मामले संसार का पहले नम्बर का देश बताया है।भारतीय समाज की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि भारत का समाज कम खर्चीला समाज रहा है। घर, परिवार औरबच्चों के साथ जीना, गली मुहल्ले में ही मिल जुल कर उत्सव मनाना, हरि भजन में समय बिताना, कम कमानाऔर कम आवश्यकतायें खड़ी करना, भारतीय सामाजिक जीवन का आधार रहा है। इसके विपरीत पश्चिमी देशों कीजीवन शैली होटलों में शराब पार्टियां करने, औरतों को बगल में लेकर नाचने, महंगी पोशाकें पहनने और अपनेखर्चों को अत्यधिक बढ़ा लेने जैसे खर्चीले शौकों पर आधारित रही है।

आजकल टी वी चैनलों और फिल्मों के पर्दे पर एक अलग तरह का भारत दिखाया जा रहा है जो हवाई जहाजों मेंघूमता है, गर्मी के मौसम में भी महंगे ऊनी सूट और टाई पहनता है तथा चिपचिपाते पसीने को रोकने के लियेचौबीसों घण्टे एयरकण्डीशनर में रहता है। टीवी और सिनेमा के पर्दे पर दिखने वाला भारत वास्तविक भारत नहींहै।

वह भारत की एक नकली तस्वीर है जो आज के बाजारवाद और उपभोक्तवाद की देन है। आज भी भारत का बहुतबड़ा हिस्सा दिन भर धूप भरी सड़कों पर फल-सब्जी का ठेला लगाता है, सड़क पर बैठकर पत्थर तोड़ता है, पेड़ केनीचे पाठशालायें लगाता है और किसी दीवार की ओट में खड़ा होकर पेशाब करता है। भारत के सकल घरेलू उत्पादमें इन लोगों का योगदान एयरकण्डीशनर में छिपकर बैठे लोगों से किसी प्रकार कम नहीं है। इन्हीं लोगों कीबदौलत कम खर्चीले समाज का निर्माण होता है। यदि इन सब लोगों को एयर कण्डीशनर में बैठने की आवश्यकतापड़ने लगी तो धरती पर तो एक यूनिट बिजली बचेगी और बिजली बनाने के लिये कोयले का एक भी टुकड़ाबचेगा। लेगटम प्रोस्पेरिटी इण्डेक्स में भारतीय समाज की इन विशेषताओं को प्रशंसा की दृष्टि से देखा गया है।

टी वी सीरियलों में भी एक अलग ही तरह का भारत दिखाया जा रहा है जहाँ बहुएं सास के विरुध्द और सास बहुओंके विरुध्द षड़यंत्र कर रही हैं। भाई एक दूसरे की इण्डस्ट्री पर कब्जा करने की योजनाएं बना रहे हैं। बेटियां अपनेपिता को शत्रु समझ रही हैं और ननद भाभियां एक दूसरे की जान की दुश्मन बनी हुई हैं। यह कैसा भारत है? कहाँरहता है यह?

आजकल एक भारत और उभर रहा है जिसने इन सारे भारतों को पीछे छोड़ दिया है। कुछ वर्ष पहले दीपा मेहता नेसिनेमा दर्शकों की जेब ढीली करने के लिये भारतीय महिलाओं में समलैंगिकता की फायर लगाने का प्रयास किया।इसी बीच बेबी खुशबू युवा हो गईं और उन्होंने फिल्म बनाने वालों का ध्यान आकर्षित करने के लिये बयान दियाकि प्रतिस्पर्धा और आधुनिकता के इस युग में भारतीय समाज नारी से कौमार्य की अपेक्षा करे। परफैक्टइण्डियन ब्राइड मानी जाने वाली अमृता राव ने जब देखा कि फिल्म निर्माता ठण्डी नायिका के रूप में देख रहे हैं तोउसने हॉट बनने के लिये बयान दे मारा कि शादी के पहले सैक्स में बुराई नहीं।

हमें लंदन के लेगटम संस्थान और ऑब्जर्वर रिसर्च फाउण्डेशन का आभारी होना चाहिये कि उन्होंने इतने सारेभारतों के बीच असली भारत को ढूंढ निकाला और सामाजिक मूल्यों के पैमाने पर भारत को सबसे पहला स्थानदिया है। हमारा भी यहर् कत्ताव्य बनता है कि हम नकली भारतों की तरफ चुंधियाई हुई ऑंखों से देखना छोड़करअसली भारत की तरफ देखना आरंभ करें।

5 comments:

  1. हमें लंदन के लेगटम संस्थान और ऑब्जर्वर रिसर्च फाउण्डेशन का आभारी होना चाहिये कि उन्होंने इतने सारेभारतों के बीच असली भारत को ढूंढ निकाला और सामाजिक मूल्यों के पैमाने पर भारत को सबसे पहला स्थानदिया है। हमारा भी यहर् कत्ताव्य बनता है कि हम नकली भारतों की तरफ चुंधियाई हुई ऑंखों से देखना छोड़करअसली भारत की तरफ देखना आरंभ करें।
    सटीक बात .. पर मानसिक तौर पर हम गुलाम न हों तब न ये बात समझ में आएगी !!

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  2. आपने सही कहा संगीताजी, हम वास्तव में बाजार, मीडिया और हमारे वोटिंग सिस्टम के गुलाम हो चुके हैं। हमें अपना मस्तिष्क काम में ही नहीं लेने दिया जा रहा है। जातिवाद, आरक्षण, करोड़पति बनने की तमन्ना जैसे दीमक हमारे सामाजिक जीवन को खोखला कर रहे हैं। श्री मनोजकुमारजी का भी आभार। – डॉ. मोहनलाल गुप्ता

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  3. you have to pay the price for development
    krishna s

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  4. yogendra singh yadavJanuary 29, 2010 at 10:19 PM

    mohan ji, yeh sab satya hai, lekin iis sab ko badalne main sabhi ko , jo comment likhte hain unhe aur jo blog likhte hain , ko sammilit roop se bhag lena hoga tasveer badal sakti hai, aaj ki naujavan peedhi bahut aalag se soch rahi hai kam se kam dohra mapdand to nahi hi aapna rahi hai jaisa hum logon ke samaay main tha, main nayi peedhi se bahut asha rakh rahan huin, jai ho.

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